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Success Story: नौकरी छोड़कर 20,000 रुपये से शुरू किया बिजनेस, आज दूसरी कंपनियों को दिया तगड़ा कॉम्पीटिशन

Success Story: आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होनें अपनी बिमारी से परेशान होकर नौकरी छोड दी और इस बिजनेस का आइडिया उनके दिमाग में आया। हम आपको बता दें कि इन्होंने 20,000 रुपये से अपना बिजनेस शुरू किया था और आज दूसरी कंपनियों को तगड़ा कॉम्पीटिशन दे रहे है। तो आइए नीचे खबर में जानते है इनकी सफलता की पूरी कहानी...

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Success Story: नौकरी छोड़कर 20,000 रुपये से शुरू किया बिजनेस, आज दूसरी कंपनियों को दिया तगड़ा कॉम्पीटिशन  

NewzFast India, New Delhi: देश में पिछले कुछ वर्षों में बिजनेस के ऐसे नए-नए आइडिया आए जो जबरदस्त तरीके से हिट हुए. फ्लिपकार्ट, ओला और जोमैटो समेत कई कंपनियां अपने यूनिक बिजनेस मॉडल की वजह से कामयाब हुईं.

हालांकि, इन कंपनियों ने ऑनलाइन मार्केट में धूम मचाई. लेकिन, हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने अपने बिजनेस आइडिया और प्रोडक्ट से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में धूम मचाई है.

खास बात है कि बच्चों की बीमारी से तंग आकर इस शख्स ने एक ऐसा बिजनेस करने के बारे में सोचा, जिससे करोड़ों लोगों को फायदा हुआ. यह काम था शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का. महज 20,000 रुपये से अपना कारोबार शुरू करने वाले महेश गुप्ता की कंपनी का टर्नओवर अब 1100 करोड़ से ज्यादा है.

20,000 से शुरू किया बिजनेस -

यह सक्सेस स्टोरी है केंट आरओ (Kent RO) के फाउंडर महेश गुप्ता की, जिन्हें अपने बच्चों की बीमारी के चलते वाटर प्यूरीफायर निर्माण का आइडिया मिला. दरअसल प्रदूषित पानी पीने से महेश गुप्ता के दोनों बच्चों को पीलिया हो गया था.

उस समय न सिर्फ उनके बच्चे बल्कि भारत में 200,000 लोग गंदे पानी के कारण इस समस्या से पीड़ित थे. इस परेशानी से पार पाने के लिए बाजार में कोई अच्छा वाटर प्यूरीफायर नहीं था. उन्होंने पाया कि मार्केट में उस वक्त उपलब्ध वाटर प्यूरिफॉयर सिर्फ अल्‍ट्रावायलेट टेक्‍नोलॉजी पर आधारित थे और यहीं से महेश गुप्ता को बिजनेस आइडिया मिला.

6 महीने की मेहनत का नतीजा -

उस वक्त महेश गुप्ता, इंडियन ऑयल में नौकरी करते थे. लेकिन, वाटर प्यूरीफायर निर्माण का बिजनेस करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी. उस दौरान उनके पास सिर्फ 20,000 रुपये थे और इसी पूंजी से उन्होंने बिजनेस शुरू किया.

महेश गुप्ता ने अमेरिका से एक मेम्बेर्न और पंप मंगाया. शुरुआत में उन्होंने होम प्यूरीफायर बनाया. लेकिन ये इतना आसान नहीं था. उन्होंने 6 महीने तक हर तकनीक को आजमाया लेकिन पानी से अशुद्धियों को अलग नहीं कर सके.

दूसरी कंपनियों को दिया तगड़ा कॉम्पीटिशन -

6 महीने तक लगातार कोशिश करने के बाद उन्हें इसका समाधान मिला. महेश गुप्ता ने अशुद्धियों को दूर करने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) तकनीक की खोज की. इस तरह 1999 में, केंट आरओ अस्तित्व में आया. हालांकि, केंट आरओ के लिए मार्केट में पहचान बनाना इतना आसान नहीं था. क्योंकि, यूरेका फोर्ब्स के पास एक्वागार्ड का स्वामित्व था और बाजार उसकी 70 % हिस्सेदारी थी.

लेकिन एक्वगार्ड को टक्कर देने के लिए महेश गुप्ता ने कम कीमत में वाटर प्यूरीफायर बेचना शुरू किया. जब एक्वागार्ड की कीमत 5,000 रुपये थी तब महेश ने अपना उत्पाद 20,000 रुपये में लॉन्च किया था. प्रोडक्ट की क्वालिटी को देखते हुए लोगों ने इसे खरीदना पसंद किया और धीरे धीरे यह बिजनेस सफलता के नए आयाम छूने लगा. अब केंट आरओ का बिजनेस वैल्यूशन करोड़ों में है.

महेश गुप्ता के अनुसार, कंपनी का पिछले साल का टर्नओवर 1100 करोड़ रहा. उनकी कंपनी अब आरओ के अलावा और भी कई प्रोडक्ट्स बना रही है. महेश गुप्ता ने अपने वाटर प्यूरीफायर की ब्रांडिंग के लिए मशहूर एक्ट्रेस हेमा मालिनी को ब्रांड एम्बेसडर बनाया था.