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Mysterious Temple: रात को इस मंदिर में भगवान की प्रतिमा हो जाती है गायब, जानिए इस चमत्कारी मंदिर की कहानी

Mysterious Temple: आज हम आपको एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहां पर भगवान की पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर के कपाट को शयन के लिए बंद कर दिए जाते है फिर वहां से भगवान की मूर्ति गायब हो जाती है। कहा जाता है कि भगवान दुकान से खुद भोग लेकर आते है। तो आइए नीचे खबर में जातने है इस मंदिर की पूरी कहानी...

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Mysterious Temple: रात को इस मंदिर में भगवान की प्रतिमा हो जाती है गायब, जानिए इस चमत्कारी मंदिर की कहानी    

NewzFast India, New Delhi: मध्य प्रदेश में बेहद प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर स्थित है। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर स्वर्ण आभूषणों के लिए मशहूर है। माना जाता है कि जो लोग गुजरात के द्वारिकाधीश मंदिर नहीं जा पाते वह इस तीन सौल पुराने मंदिर में आकर भगवान के दर्शन करते हैं और भगवान उनकी प्रार्थना स्वीकार करते हैं।

इस मंदिर को बेहद चमत्कारी माना जाता है। रतलाम में स्थित मंदिर चमत्कारों के बारे में स्थानीय लोग बताते हैं। काशीराम पालीवाल ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। 

स्थानीय लोग बताते हैं कि मंदिर में भगवान द्वारिकाधीश की प्रतिमा रात में गायब हो जाती थी। भगवान की पूजा-अर्चना करने के बाद मंदिर के कपाट को शयन के लिए बंद कर दिए जाते थे, लेकिन सुबह मूर्ति गायब रहती थी। तब खोज होती थी तो मूर्ति को जहां से लाया गया था, उसी संत के पास मिलती थी।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, काशीराम पालीवाल के सदस्य का कहना है कि रात में भगवान मूर्ति बार-बार लापता होने लगी और संत के पास चली जाती।

इसके बाद काशीराम पालीवाल ने फैसला किया कि प्रतिमा को अभिमंत्रित कराया जाए और भगवान को यहीं पर रोका जाए। अभिमंत्रों के द्वारा भगवान की प्रतिमा को रोका गया, जिससे भगवान नाराज हो गए। उन्होंने काशीराम को श्राप दिया कि तुमको इसका दंड मिलेगा। 

काशीराम के स्वप्न में आकर भगवान ने कहा कि तक तुम्हारा वंश पांच पीढ़ी तक नहीं बढ़ पाएगा। काशीराम ने भगवान के श्राप को स्वीकार किया और कहा कि आपका निर्णय मंजूर है, लेकिन हम आपकी यहां पर सेवा करते रहेंगे। उन्होंने ऐसा ही किया। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, काशीराम पालीवाल के परिवार में पांच पीढ़ी तक कोई वंशज नहीं हुआ। सालों बाद उनकी बेटी के घर में एक पुत्र का जन्म हुआ। इससे पहले गोद लिए गए बच्चे ही परिवार और मंदिर की सेवा करते रहे। 

जब दुकान से भगवान खुद भोग लेकर आए

रिपोर्ट के मुताबिक, रतलाम के द्वारिकाधीश मंदिर से जुड़ा एक और हैरान करने वाला चमत्कार सुना जाता है। कलीराम बा की मिठाई की दुकान से हर दिन भगवान द्वारिकाधीश को भोग लगाने के लिए पेड़े जाते थे। एक बार पेड़े का भोग मंदिर नहीं पहुंच पाया, तो भगवान भेष बदलकर मिठाई की दुकान से पेड़े लेकर आए। 

दुकानदार ने जब उनसे पैसे देने को कहे, तो उन्होंने अपना कंगन दे दिया। भगवान ने काशीराम पालीवाल को यह बात स्वप्न में आकर बताई। अगले दिन भगवान की प्रतिमा से कंगल गायब मिला, जिसके बाद हड़कंप मच गया।

इसके बाद काशीराम पालीवाल ने कहा कि भगवान के कंगन कलीराम बा की दुकान पर मिलेंगे। जब लोग वहां पर गए, तो कंगन मिल गया। इसके बाद जब तक वह दुकान बंद नहीं हुई, तब तक भगवान के लिए भोग वहीं से मंदिर जाता रहा। 

गुजरात के द्वारिका मंदिर में स्थापित मूर्ति की तरह रतलाम में भगवान द्वारिकाधीश की प्रतिमा है। द्वारिका की तरह ही यहां पर भगवान के दर्शन के लिए सात द्वार पार करके जाना पड़ता है। आज भी लोग भगवान के चमत्कारों पर भरोसा करते हैं और कहा जाता है कि मांगी गई मन्नत पूरी होती है।