newz fast

Noida News: किसानों को जमीन बेचने के लिए नहीं किया जा सकता बाध्य, हाईकोर्ट ने कही ये बड़ी बात

NCR: हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक आपको बता दें कि हाईकोर्ट ने नोएडा के किसानों की मर्जी के बगैर उन्हें अपनी जमीन बेचने के लिए बाध्य न करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सरकार को जमीन की जरूरत हो तो वह नियमानुसार अधिग्रहण कर सकती है। कोर्ट की ओर से आए इस फैसले को विस्तार से जानने के लिए खबर को पूरा पढ़े।  
 | 
किसानों को जमीन बेचने के लिए नहीं किया जा सकता बाध्य, हाईकोर्ट ने कही ये बड़ी बात 

NewzFast India, New Delhi: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के किसानों की मर्जी के बगैर उन्हें अपनी जमीन बेचने के लिए बाध्य न करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को जमीन की जरूरत हो तो वह नियमानुसार अधिग्रहण कर सकती है।

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति एमके गुप्ता एवं न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ ने महेंदर सिंह व 98 अन्य किसानों की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

याचियों के अधिवक्ता प्रेम कुमार चौरसिया का कहना है कि नोएडा जेवर तहसील के तइरथलई, तिरथली खेड़ा, राबूपुरा, कटौली बांगर, अकालपुर, कुरैब, चकबीरमपुर व बीरमपुर गांव के किसानों को भूमिधरी खेती की जमीन जबरन अपने पक्ष में बेचने के लिए बाध्य कर रहा है। 

कहा गया कि किसान अपनी जमीन बेचना नहीं चाहते हैं। प्राधिकरण के अधिवक्ता का कहना था कि प्राधिकरण ने किसानों को लोकहित के कार्य के लिए अपनी जमीन बेचने का प्रस्ताव दिया है।

मर्जी के खिलाफ किसी को बाध्य नहीं किया जा रहा है। जो किसान मुआवजा लेने के लिए तैयार होंगे, उन्हीं की जमीन ली जाएगी। किसी की जमीन पर कब्जा नहीं करने जा रहे हैं, जब तक वे मुआवजा लेने के लिए राजी नहीं हो जाते। इस पर कोर्ट ने उक्त आदेश दिया है।

नोटरी नियुक्ति मामले में जवाब तलब-

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 29 मई को जारी अधिसूचना के तहत नोटरी नियुक्ति में आरक्षण नियमों की अनदेखी करने के विरुद्ध दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने रामचंद्र सिंह की याचिका पर अधिवक्ता योगेंद्र कुमार यादव को सुनकर दिया है।

एडवोकेट योगेंद्र यादव का कहना है कि सात मार्च 2007 विशेष सचिव अपर विधि परामर्शी ने सोनभद्र के जिला जज को आरक्षण नियम के अनुसार नोटरी की नियुक्ति का आदेश दिया था। 26 अक्तूबर 2021 को भी नोटरी नियुक्ति के लिए मांगे गए विज्ञापन में रिजर्वेशन पॉलिसी के अनुसार जिला स्तर पर नियुक्ति की गई थी।

29 मई 2023 से प्रदेश स्तर पर नोटरी नियुक्ति में आरक्षण नियमों को लागू नहीं किया गया है, जो संविधान का उल्लघंन है। इस तर्क के समर्थन में कोर्ट की कुछ नजीरें पेश की गईं।

राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता अंबरीष शुक्ल ने कहा कि नोटरी की नियुक्ति नौकरी देना नहीं है। नोटरी नियमावली 1956 के नियम 8 व नोटरी कानून 1952की धारा 2डी के तहत नोटरी को आबद्ध किया जाता है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है। ऑफलाइन मोड से मांगे गए आवेदन में रिजर्वेशन के अनुसार आवेदन आमंत्रित किया गया था।